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ग्राम कोहदड़ में चल रही अमृतमयी श्रीमद् भागवत कथा का वाचन निमाड़ की गौरव सुविख्यात कथावाचिका सुश्री दीदी चेतना भारतीजी के मुखारविंद से किया जा रहा है।

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ग्राम कोहदड़ में चल रही अमृतमयी श्रीमद् भागवत कथा का वाचन निमाड़ की गौरव सुविख्यात कथावाचिका सुश्री दीदी चेतना भारतीजी के मुखारविंद से किया जा रहा है। परम पुण्यप्रदा अक्षय आनंददायिनी मोक्ष प्रदायिनी श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस में दीदीश्री ने चिदाकाश ब्रम्हस्वरूप भगवान शिव तथा हिमाचलराज की कन्या जगत जननी भगवती अंबा माता पार्वती के मंगल परिणय की दिव्य कथा सुनाई। दीदीश्री ने कहा की शिव ही जीवन के मूल है तथा शिवतत्व को जान लेना ही मनुष्य जीवन का मूल उद्देश्य है। जब आदिदेव महादेव दुल्हा बने तो भस्म भूषितांग स्वरूप बनाया, कर्पूर की भाती गौर अंग पर विमल विभूति लगाई, शीश पर सुंदर जटाएं तथा जगत पावनी मंदाकिनी गंगा को विराजमान किया, गले में कालरूपी सर्पों की माला तथा मुंडमाला धारण की, भालनेत्र तथा शीश पर वक्रचंद्र धारण किया है बाबा महादेव ने। संसार के सबसे सुंदर दूल्हे करुणावतार भगवान भोलेनाथ तथा शैलपुत्री भगवती पार्वती के पावन मंगलमई विवाह कथा का श्रवण सभी भक्तो ने एकचित्त होकर किया। समस्त ग्राम वासियों के द्वारा कथा का भव्य आयोजन किया गया है।

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